भोपाल। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा इस्तीफे की पेशकश पर पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं की लंबी चुप्पी के बाद शुक्रवार को एकाएक कांग्रेस के कायाकल्प की खातिर इस्तीफा देने वालों की कतार लग गई। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने अपना इस्तीफा भेज दिया, जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की है। अभा कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विवेक तनखा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी नई टीम गठन के लिए अपने पद छोड़ दिए हैं।

कांग्रेस संगठन में इस मुद्दे पर चल रही उथल-पुथल को लेकर एक दिन पूर्व राहुल गांधी की नाराजगी सामने आने के बाद शुक्रवार को एकाएक दिग्गज नेताओं के इस्तीफों का दौर शुरू हो गया। राज्यसभा सदस्य एवं पार्टी में विधि प्रकोष्ठ प्रमुख विवेक तनखा के बाद मप्र कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया ने भी अपना इस्तीफा पार्टी मुख्यालय भेज दिया।

बाबरिया ने 'नईदुनिया" से चर्चा में बताया कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार की जवाबदारी अकेले राहुलजी की नहीं है, यह पूरी पार्टी की जिम्मेदारी है। इसलिए मैंने भी अपना इस्तीफा भेज दिया है। उधर, मुख्यमंत्री कमलनाथ इस मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में चुनाव में मिली हार के लिए वह स्वयं जिम्मेदार हैं, अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश भी कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में राहुल गांधी के समर्थन में उनके घर के सामने एकत्र हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के सामने उन्होंने नाखुशी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि मुझे इस बात का दुख है कि मेरे इस्तीफे के बाद किसी मुख्यमंत्री, महासचिव अथवा प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया। युवा कांग्रेस के एक नेता ने जब राहुल से कहा कि यह सामूहिक हार है सबकी जिम्मेदारी बनती है तो सिर्फ आपका ही इस्तीफा क्यों? इस पर राहुल ने उक्त बात कही थी।

पूरी कार्यकारिणी शामिल है

मप्र मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा से जब प्रदेश के बाकी नेताओं के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के इस्तीफे की पेशकश में पूरी कार्यकारिणी ही शामिल है। उधर, विवेक तनखा पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी लंबे समय तक यह गतिरोध नहीं झेल सकती, इसलिए नई टीम के गठन की खातिर सभी को अपने पद से इस्तीफे सौंप देना चाहिए।

दिग्गजों को उपकृत किए जाने की तैयारी

कांग्रेस में मची सियासी उथल-पुथल के साथ ही प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पराजय देख चुके दिग्गज नेताओं के पुनर्वास की अटकलें तेज हो गई हैं। इनमें सुरेश पचौरी, अजय सिंह राहुल, अरुण यादव, डॉ राजेंद्र सिंह सहित रामेश्वर नीखरा और शोभा ओझा के नामों की चर्चा है। इनके अलावा कुछ अन्य नेताओं को भी उपकृत किए जाने पर विचार मंथन चल रहा है।

अप्रैल 2018 में मिली थी कमलनाथ को कमान

उल्लेखनीय है कि कमलनाथ को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले अप्रैल 2018 में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मप्र में 15 साल के बाद सत्ता में वापसी की, कमलनाथ ने दिसंबर में मुख्यमंत्री पद संभाला। लोकसभा चुनाव में मिली पराजय के बाद नैतिक जवाबदारी लेते हुए कमलनाथ ने अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की है। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें फिलहाल पार्टी पद पर बने रहने और जवाबदारी संभालने को कहा है।