भोपाल। कांग्रेस अध्यक्ष के नाते राहुल गांधी द्वारा लोकसभा चुनाव के लगभग सवा महीने बाद लिए राजनीतिक फैसले से मप्र के सिंधिया समर्थक उत्साहित है। फैसला छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मोहन मरकाम की नियुक्ति का है। छत्तीसगढ़ में भी मध्यप्रदेश की तरह मुख्यमंत्री के पास ही प्रदेश अध्यक्ष की भी जवाबदारी थी।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के बाद से मप्र कांग्रेस संगठन में बदलाव की चर्चा चल रही है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ चुनाव परिणाम आने के तत्काल बाद कांग्रेस अध्यक्ष के समक्ष संगठन का पद त्यागने की पेशकश कर चुके थे।

हालांकि राहुल गांधी द्वारा गुरुवार को कही गयी बातों से यह आभास होता है कि उनके इस्तीफे की पेशकश के बाद किसी भी बड़े नेता ने पद त्यागने की पेशकश नहीं की। नाथ ने गुरुवार को मप्र में हार की जवाबदारी लेते हुए कहा था कि राहुल गांधी सही है। मैं नहीं जानता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है लेकिन मैंने पहले इस्तीफे की पेशकश की थी।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार मप्र समेत छत्तीगढ़ में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नियुक्ति प्रस्तावित थी। वहां भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास विधानसभा चुनाव के पूर्व से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व भी था। पार्टी ने लोकसभा चुनाव के समय एक रणनीति के तहत मुख्यमंत्री और अध्यक्ष की जवाबदारी एक ही व्यक्ति के हाथ में रखना तय किया था जिससे अनावश्यक विवाद न हो। हालांकि इसके पार्टी को कोई खास लाभ नहीं मिला। तीनों ही प्रदेशों में लोकसभा चुनावों में पार्टी को करारी शिकस्त उठानी पड़ी। इसके बाद से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नाराज चल रहे हैं।

उनके द्वारा पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश के सवा माह बाद शुक्रवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को हरी झंडी दे दी गई जबकि मप्र का मामला लंबित है। यहां पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर लिया जा रहा है। सिंधिया समर्थक मंत्री विधायकों ने तो इसके लिए बाकायदा मुहिम भी छेड़ रखी हैं । हालांकि सिंधिया का प्रदेश अध्यक्ष बनना इतना आसान नहीं है।

कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पीसीसी अध्यक्ष पद पर उनकी ताजपोशी की राह में कई रोड़े खड़े रखे हैं। पर यह भी सही है कि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर अनिर्णय की स्थिति ज्यादा लंबी नहीं रहेगी। सिंधिया को राहुल और प्रियंका गांधी का नजदीकी माना जाता है। इस नाते उनका दावा मजबूत है। सिंधिया समर्थकों को भी छत्तीसगढ़ के फैसले के बाद आशा जगी हैं। जबकि नाथ चाहते हैं कि बाला बच्चन जैसा कोई नाम इस पद के लिए फाइनल हो जाए। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल जाएगा।