भोपाल। कोटरा सुल्तानाबाद क्षेत्र में 9 वर्षीय मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने वाले विष्णु भामौरे को जिला अदालत ने गुस्र्वार को दोहरे मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसमें एक हत्या के लिए और दूसरी सजा दुष्कर्म के लिए है। इसके अलावा अदालत ने अभियुक्त को अप्राकृतिक कृत्य के अपराध में उम्र कैद, अपहरण व सबूत छिपाने के अपराध में 7 साल की कैद और 4 हजार रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश कुमुदनी पटेल ने सुनाया है। अदालत का फैसला दुष्कर्म की घटना के 33 दिन में आ गया है। 

हत्या के बाद भी एक बार किया था दुष्कर्म

8 जून को कोटरा सुल्तानाबाद की मांडवा बस्ती में रहने वाली एक बच्ची रात आठ बजे दुकान पर सामान लेने गई थी, लेकिन फिर घर नहीं लौटी। पूछताछ करने पर दुकान वाले ने बताया कि वह 10 से 15 मिनट पहले ही सामान लेकर निकली है। बच्ची की तलाश करने पर वह नहीं मिली।

पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। रात भर बच्ची के परिवार वालों के साथ दुष्कर्म का अपराधी विष्णु बच्ची को ढूंढने का नाटक करता रहा। सुबह पांच बजे घर के बाजू में स्थित नाले के पास बच्ची की लाश मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची के साथ हत्या से पहले दो बार और हत्या के बाद भी एक बार दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य किया गया है। विष्णु की झुग्गी की तलाशी ली गई तो वहां बच्ची की चूड़ियां मिली थीं।

पुलिस ने कॉल डिटेल निकलवा कर उसे खंडवा से पकड़ा था और फिर अदालत में पेश किया। विष्णु ने बताया कि उसने रात भर बच्ची को ढूंढने का नाटक करने के बाद सुबह-सुबह बच्ची की लाश नाले के किनारे रख दी थी। पुलिस ने 4 दिन में विष्णु के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की। विष्णु के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366, 376, 302 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। 

फैसले में महत्वपूर्ण साबित हुआ डीएनए और फॉरेंसिक टेस्ट

पुलिस ने मामले में तत्परता दिखाते हुए घ्ाटना के चार दिन बाद ही चालान पेश कर दिया था। चालान पेश किए जाते समय 34 गवाहों की सूची पेश की गई थी। मामले में सबूत जुटाने के लिए पुलिस ने डीएनए टेस्ट और आरएफएसएल जांच कराई थी जो अदालत के फैसले में महत्वपूर्ण सबूत साबित हुई। मामले में 20 जून से गवाही का दौर शुरू हो गया था जिसके बाद अदालत ने शुक्रवार को 57 पन्न्ों का फैसला सुनाया है।

राजधानी में दुष्कर्म मामले में चौथी फांसी की सजा 

राजधानी की अदालत ने दुष्कर्म के मामलों में फांसी की चौथी सजा सुनाई है। इससे पूर्व तत्कालीन जिला न्यायाधीश रेणु शर्मा ने अभियुक्त दिलीप बनकर को, विशेष न्यायाधीश सईदाबानो रहमान ने अभियुक्त मुस्तफा को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा पूर्व जिला न्यायाधीश शैलेन्द्र शुक्ला और सुष्मा खोसला भी एक-एक मामले में फांसी की सजा का फैसला सुना चुके हैं। 

मप्र में फांसी के मामले

- 7 लोगों को 2019 में सुनाई जा चुकी है फांसी की सजा

- 6 मामले दुष्कर्म और दुष्कर्म के बाद हत्या के

- 2018 में 21 लोगों को फांसी की सजा सुनाई

- 2018 में मप्र में सबसे ज्यादा लोगों को सुनाई सजा

- अब तक किसी भी राज्य में कभी 21 लोगों को नहीं सुनाई गई फांसी की सजा